Sunday, January 1, 2017

Who is responsible for Demonetization

मध्य रात्रि, 9 नवम्बर 2016 भारत वर्ष के इतिहास का वो दिन जिसे शायद ही कोई भारतीय भूल पायेगा ! मोजुदा सरकार के 500 और 1000 के नोट बंद करने के एक फैसले ने पुरे देश को हिला कर रख दिया ! कुछ लोगो ने माना की इंदिरा जी के समय जो आपातकाल लगाया गया था ये फैसला उससे भी बड़ा था !
                 इस फैसले का भारत की जनता ने खुले दिल से स्वागत किया ये सोच कर की शायद माननीय प्रधानमंत्री जी के इस फैसले से देश की अर्थव्यस्था मैं सुधार होगा और कही न कही देश मैं भ्रष्टाचार कम होगा! इस फैसले के बाद कुछ बुद्धिजीवीयो ने मोदी जी की तुलना उतरी कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन से की और कुछ ने उन्हें नासमझ समझा! पर यहाँ अहम सवाल ये है की विमुद्रीकरण के लिए जिम्मेदार कोन हैं ?
               बेशक सरकार का यह कदम भारत में काले धन के नकद हिस्से के लिए मौत का फरमान हैं पर कतार मैं लग कर नोट बदलवाने में कई लोगो की मौत हो गई इस मौत के लिए जिम्मेदार कौन है ?जिन लोगों ने विमुद्रीकरण का निर्णय लिया है, क्या वे इस मौत की जिम्मेदारी लेंगे ?विमुद्रीकरण से आई इस तबाही से परेशान होकर लोग सिर्फ सरकार को गालिया दे रहे है!
               पर यहाँ सोचने वाली बात ये है की क्या सिर्फ अकेले मोदी जी ने ये फैसला लिया था ? शायद नही क्यों की जब भी देश मैं कोई भी नियम और पॉलिसी बनते है तो वो एक समूह विशेष का निर्णय होता है और सरकार उस नियम और पोलिसी को प्रदर्शित और लागु करने का एक चहरा होती है या यूँ कहे सरकार तो बस नाम लूटती है!

               रिज़र्व बैंक भारत की अर्थव्यवस्था का अभिन्न अंग है जो भारत मैं मुद्रा के चलन और परिचालन का पूरा नियंत्रण करता है! रिजर्व बैंक का गवर्नर जो भी सर्कुलर जारी करता है वित मंत्रालय उसका स्पष्टीकरण देते हैं तो क्या विमुद्रीकरण के लिए अकेले सरकार जिम्मेदार हैं? किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए रिजर्व बैंक का गवर्नर उतना ही जिम्मेदार है जितना उस देश की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार!

               जहां एक और बताया गया की 1 हफ्ते में शहरी और 2 हफ्ते में ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति सामान्य हो जाएंगी वही दूसरी और रिजर्व बैंक के नियम हर दिन बदलते नज़र आ रहे हैं! बदलते नियमो के चलते आम जन को जो परेशानी हो रही है उसके लिए जिम्मेदार कोन हैं?
              भारतीय रिजर्व बैंक को बेहद तजुर्बेदार व्यक्तियों की जरुरत है, जो सरकार को बता सके कि कौन सा कदम गलत हे और कोनसा सही और साथ ही शानदार और सटीक प्लैंनिंग भी कर सके । यह कहना गलत नहीं होगा कि सरकार के साथ रिजर्व बैंक की कमेटी भी उतनी ही इस दुविधा के लिए जिम्मेदार है!
              अंत मैं सिर्फ यही कहना चाहता हु की मैं देश की अर्थव्यवस्था से काले धन को समाप्त करने के खिलाफ नहीं हूँ मैं सिर्फ इस तरीके के खिलाफ हूँ क्योंकि इसे जनता को समय दिए बगैर लागू किया गया।


       
                       

2 comments:

  1. Aapki Abhivyakti Hume pasand aaye... Ache vichaar he.. Main chahunga ke iske sath aap kuch sujhaav bhi de....

    Bahut bahut shubhkaamnaaye... kripiya likhte rahe...

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