भारत में GST सिस्टम लागू हो गया है| इसको आर्थिक आज़ादी भी कहा जा रहा है| कायदे से तो ये "लगान" हैं समझ गए ना आप लोग आमिर खान की फिल्म वाली "लगान" और यकीं मानिये इस लगान को आज़ादी कहने वाले लोगों की समझदारी का मानसिक टेस्ट होना चाहिए,लेकिन इस सरकार के राज़ मैं तो आजकल टेस्ट बस पेशेंस पर लिया जा रहा है|
जहाँ भी जाओ बस
मोदी की जय हो रही है चाहे वो अपना देश हो या फिर विदेश, इन हालातो मैं बस सिर्फ जय है वीरू कोई
भी नहीं एक वीरू था क्रिकेट मैं जो भी आज कल ट्वीटर पर जय बोल रहा है! मैं नहीं
मानता की जय करना या होना बुरी बात है पर अगर इस जय पर व्यंग लिखा जाये तो लोग
नेगेटिव मान लेते है और मान भी ले साला तो किसे फर्क पड़ता है वैसे भी पॉजिटिव मैं तो सिर्फ बिल आ रहा है वो भी खर्चे का!
भारत एक गरीब
देश है और कहा जा रहा है की GST से गरीबों को ही फायदा होगा! 1947 से अब तक की हर स्कीम सिर्फ गरीबों के
लिए ही है और स्कीम का फायदा लेना है इसलिए हर व्यक्ति गरीब बना रहता है! कई गरीब ईमानदार हैं| उन्होंने कबूल लिया कि GST से उनको फायदा हुआ है| अम्बानी और अडानी भी वैसे ही कुछ ईमानदार
गरीबों में से हैं|
चलिए समझते है
की टेक्स से गरीबो का क्या फायदा होता है! टेक्स से सहारे सरकार गरीबो को लोन देती
है और लोन के पैसो से कुछ गरीब माल्या जैसे लोग ब्रिटेन मैं सेटल हो जाते है और
सरकार फिर से कंगाल हो जाती है! कंगाल होते ही वो फिर से टेक्स लेती है और गरीब और
गरीब हो जाता है इस तरह से हर गरीब का
फायदा होता है|
GST देश मैं आजादी
ले कर आया हैं हर तरह की आजादी पैसे लेकर विदेश भाग जाने वालो को "आर्थिक
आजादी" आत्महत्या कर गरीबी मैं मर जाने वालो को "शारीरिक आजादी"
टेक्स के नाम पर अनपढ़ लोगो को धमकाने वाले बैंको को "सरकारी आजादी" और GST लागु करते ही विदेशी दोरो पर निकल जाने
वाले को "मानसिक आजादी"
ये वो आजादी
नहीं है जो 1947
मैं मिली थी ये तो पक्की वाली
आजादी है जो की टेक्स के पर्चे के साथ आई है!
आइये मन लगाकर टैक्स दें, क्योंकि तभी तो
हम और गरीब होंगे और तभी ये टैक्स हमारा भला कर पायेगा!
भारत माता की जय!