Thursday, September 14, 2017

Country No. 1

अक्सर हमारे पीएम साहेब और उनकी चमचा-टोली देश को नम्बर एक बनाने की बात करती है..
बस किस-किस क्षेत्र में नम्बर एक बनेगा ये साइकोलॉजी के P की तरह साइलेंट रह जाता है..


बस्स.. जनता बड़ी बातो से खुश है .. “वाह! मोदी जी.. क्या बात कह दी.. जान लुट ली भाई ने तो ..”

बाकी बचे कुछ ज्ञानी लोग, जोकि खुद को प्राइवेट से ज्यादा शोषित, पूर्ण सरकारी से ज्यादा टैलेंटेड और चूरन बेचने वाले से ज्यादा गरीब मानते हैं.. वो सवाल उठाना चाहते हैं.. कि..

“हे देश के राजाधिराज, सोशलमिडीयोलोजीस्ट, सेल्फीश्रेष्ठ, मोदी जी.. अब ये बता दो की कौनसे फील्ड में देश एक नम्बर बनेगा"..


वो क्या हे की भुखमरी, बेरोजगारी, जनसंख्या, बीमारी, गबन, बेईमानी आदि में तो हम टॉप पे हे .. और बाकी बढियां चीज़ में बस.. ट्रेन में रिजर्वेशन की सीट दे दीजिये..पर सुना हे की वो भी आज कल वो भी पटरी पर नहीं चल रही !

आप तो बस विदेश के किसी स्टेडियम में तालीदार भाषण दे दीजिये.. पेपर में विज्ञापन दे दीजिये कि बिजली 24 घंटे मिलेगी.. चाहे नीचे स्टार लगा के लिखा हो कि अगर खाली बल्लब जलाओ तब..बस इतने पे सबको देश टॉप पे जाता दिख जाता है

तो मान्यवर ये बताओ की  नंबर एक बनने को कोई प्लान है..? कुछ एक्शन है..? की खाली टैक्स बढ़ा के GDP का तम्बू तान के बाजा बाजा दो.. कि भईया बस ये आया एक नम्बर.. बस आया ही समझो..? तब तक अगर दाल महंगी हे तो लौकी का सूप पियो..!”

ये सवाल उठे इससे पहिले ही पर्दे के पीछे से सस्ते वाले चाणक्य.. अमित शाह का ऑफर आ जाता है इन सवाल उठाने वालो को..और फिर देश और प्रेस कांफ्रेंस दोनों आगे बढ़ जाते हे! 


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Disclaimer :- इस ब्लॉग में मेरे अपने निजी विचार हैं, जिन्हें मैंने सलीके से व्यक्त करने की कोशिश की है. इसके लिए मैंने  इन्टरनेट पर उपलब्ध कंटेंट की सहायता ली गयी है. यदि कहीं त्रुटि रह गयी हो तो 'कमेंट बॉक्स'मैं मुझे लिखित रूप में सूचित करे ताकि इसे संशोदित कर और भी बहतर बनाया जा सके ऐसा मुझे विश्वास है!



Thursday, July 6, 2017

गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स (GST)


भारत में GST सिस्टम लागू हो गया है| इसको आर्थिक आज़ादी भी कहा जा रहा है| कायदे से तो ये "लगान" हैं समझ गए ना आप लोग आमिर खान की फिल्म वाली "लगान" और यकीं मानिये इस लगान को आज़ादी कहने वाले लोगों की समझदारी का मानसिक टेस्ट होना चाहिए,लेकिन इस सरकार के राज़ मैं तो आजकल टेस्ट बस पेशेंस पर लिया जा रहा है|

   जहाँ भी जाओ बस मोदी की जय हो रही है चाहे वो अपना देश हो या फिर विदेश, इन हालातो मैं बस सिर्फ जय है वीरू कोई भी नहीं एक वीरू था क्रिकेट मैं जो भी आज कल ट्वीटर पर जय बोल रहा है! मैं नहीं मानता की जय करना या होना बुरी बात है पर अगर इस जय पर व्यंग लिखा जाये तो लोग नेगेटिव मान लेते है और मान भी ले साला तो किसे फर्क पड़ता है वैसे भी पॉजिटिव मैं तो सिर्फ बिल आ रहा है वो भी खर्चे का!  

   भारत एक गरीब देश है और कहा जा रहा है की GST से गरीबों को ही फायदा होगा! 1947 से अब तक की हर स्कीम सिर्फ गरीबों के लिए ही है और स्कीम का फायदा लेना है इसलिए हर व्यक्ति गरीब बना रहता है! कई गरीब ईमानदार हैं| उन्होंने कबूल लिया कि GST से उनको फायदा हुआ है| अम्बानी और अडानी भी वैसे ही कुछ ईमानदार गरीबों में से हैं|

  चलिए समझते है की टेक्स से गरीबो का क्या फायदा होता है! टेक्स से सहारे सरकार गरीबो को लोन देती है और लोन के पैसो से कुछ गरीब माल्या जैसे लोग ब्रिटेन मैं सेटल हो जाते है और सरकार फिर से कंगाल हो जाती है! कंगाल होते ही वो फिर से टेक्स लेती है और गरीब और गरीब हो जाता है इस तरह से हर गरीब का फायदा होता है

  GST देश मैं आजादी ले कर आया हैं हर तरह की आजादी पैसे लेकर विदेश भाग जाने वालो को "आर्थिक आजादी" आत्महत्या कर गरीबी मैं मर जाने वालो को "शारीरिक आजादी" टेक्स के नाम पर अनपढ़ लोगो को धमकाने वाले बैंको को "सरकारी आजादी" और GST लागु करते ही विदेशी दोरो पर निकल जाने वाले को "मानसिक आजादी"

  ये वो आजादी नहीं है जो 1947 मैं मिली थी ये तो पक्की वाली आजादी है जो की टेक्स के पर्चे के साथ आई है!
आइये मन लगाकर टैक्स दें, क्योंकि तभी तो हम और गरीब होंगे और तभी ये टैक्स हमारा भला कर पायेगा!

भारत माता की जय! 


Wednesday, March 1, 2017

UP Election 2017 (चुनाव की रासलीला)

जैसे बेबी को बेस पसंद है वैसे कांग्रेस को साथ पसंद है! और जैसे दलित की बेटी का हाथी चलता है वैसे ही समाजवादियो का काम बोलता है! ओर विकास महज प्रचार प्रसार और पोस्टर तक सिमित रह गया है!

उत्तर प्रदेश के चुनाव 7 चरणों मैं होने वाले हे और यकीं मानिये अंतिंम चरण मैं आते आते नेताओ ने एक दुसरे पर कीचड़ उछालना और ना सिर्फ कीचड़ उछालना बल्कि ऐसे घटिया भाषा एवम आपतिजनक शब्दों का प्रयोग करना जिसको सुनकर ये आश्चर्य होता है कि क्या ये वही नेता है जिनको हम अपना प्रतिनिधित्व करने के लिए चुन रहे है!

ऐसा लग रहा है कि उत्तर प्रदेश में चुनावी दंगल हो रहा है, जिसमें हर कोई एक दूसरे को हराने की कोशिश में लगा हुआ है!साम्प्रदायिक मुद्दों से लेकर सवेदनशील टिप्णीयो मैं इन नेताओ ने मानो PHD कर रखी है! यहाँ तक की माननीय प्रधानमंत्री जी के पास भी वाट्सएप्प, फेसबुक और ट्विटर के जोक्स का सारा कलेक्शन हैं! और अनोखे अंदाज मैं जब भी वो विरोधियो पर हमला बोलते है तो उनके भक्त ख़ुशी से झूम उठते हैं!

भाजपा के चुनावी प्रचार के दौरान कब्रिस्तानों की बाउंड्रीवाल और रमजान में 24 घण्टे बिजली जबकि दिवाली के दिन भी बिजली गायब रहने की बात उठाकर भाजपा का पुराना दांव चल दिया! और जो पार्टी हमेशा ये कहती आई है की सपा ने हमेशा सांप्रदायिक और धर्मं की राजनीती की है उन्ही की पार्टी के एक मंत्री को चुनावी रैली मैं ये कहते हुए सुना गया की 'यूपी के धौलाना को मौलाना विधानसभा' नहीं बनने देंगे!

बीजेपी के राज्यसभा सांसद विनय कटियार का बयान तो आप लोगों  को याद ही होगा, जिसमें उन्होंने प्रियंका गाँधी को टक्कर देने के लिए बीजेपी की सुन्दर महिला कार्यकर्ताओं और अभिनेत्रियों को मैदान में उतारने की बात तक कर डाली. अब इन नेताओं से उम्मीद करना कि ये 'महिला सम्मान' को जारी रखेंगे, बेमानी ही है. 
ऐसा नहीं है कि सिर्फ बीजेपी में ही ये बाते हो रही है बल्कि सपा नेता भी खूब जम कर अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं. अखिलेश यादव भी पुनः सत्ता मैं आने की चाह मैं नज़र आ रहे है और उन्होंने भी विपक्ष पर तीर साधते हुए अमिताभ जी से ये कह डाला की आप गुजरात मैं गधो का प्रचार करना बंद कीजिये! वही दूसरी और सपा के एक मंत्री ने बीजेपी को बड़ा राक्षस और कांग्रेस को छोटा राक्षस बताते हुए कहा कि छोटे राक्षसों से हाथ इसलिए मिलाया है कि बड़े राक्षस को रोक सकें! और कुछ ने अपनी रेली मैं पीएम मोदी और अमित शाह दोनों को 'आतंकवादी' ही बता डाला!
संवेदनशील बयान और बकवासबाजी के चलते बसपा कहा पीछे रहने वाली थी बसपा के ही एक प्रत्याशी ने एक रैली में  बीजेपी का डर दिखाते हुए मुसलमानों  से अनुरोध किया है कि बीजेपी को रोको वरना बीजेपी तुमको रोजा नहीं रखने देगी, नमाज पढ़नी भी बंद हो जाएगी.  इन नेताओं के पास सत्ता में आने का एक मात्र रास्ता यही दिखता है कि भोली-भाली जनता को डरा कर उनका वोट हासिल किया जाये!

वो कहते है ना की 'अंत भला तो सब भला' एक दुसरे पर किचड़ उछालना और जनता का ध्यान भटका कर खुद अपने ही काम का हिसाब नहीं देने का ये तरीका बहुत पुराना है! पाच सालो के लिए सुरक्षित होने के लिए ये सियासी दाव बेहद जबरदस्त है!पर उन्हें ये नही भूलना चाहिये की "ये पब्लिक है ये सब जानती है"!
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Disclaimer :- इस ब्लॉग में मेरे अपने निजी विचार हैं, जिन्हें मैंने सलीके से व्यक्त करने की कोशिश की है. इसके लिए मैंने प्रिंट मीडिया, इन्टरनेट पर उपलब्ध कंटेंट की सहायता ली गयी है. यदि कहीं त्रुटि रह गयी हो तो 'कमेंट बॉक्स'मैं मुझे लिखित रूप में सूचित करे ताकि इसे संशोदित कर और भी बहतर बनाया जा सके ऐसा मुझे विश्वास है!

Sunday, January 1, 2017

Who is responsible for Demonetization

मध्य रात्रि, 9 नवम्बर 2016 भारत वर्ष के इतिहास का वो दिन जिसे शायद ही कोई भारतीय भूल पायेगा ! मोजुदा सरकार के 500 और 1000 के नोट बंद करने के एक फैसले ने पुरे देश को हिला कर रख दिया ! कुछ लोगो ने माना की इंदिरा जी के समय जो आपातकाल लगाया गया था ये फैसला उससे भी बड़ा था !
                 इस फैसले का भारत की जनता ने खुले दिल से स्वागत किया ये सोच कर की शायद माननीय प्रधानमंत्री जी के इस फैसले से देश की अर्थव्यस्था मैं सुधार होगा और कही न कही देश मैं भ्रष्टाचार कम होगा! इस फैसले के बाद कुछ बुद्धिजीवीयो ने मोदी जी की तुलना उतरी कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन से की और कुछ ने उन्हें नासमझ समझा! पर यहाँ अहम सवाल ये है की विमुद्रीकरण के लिए जिम्मेदार कोन हैं ?
               बेशक सरकार का यह कदम भारत में काले धन के नकद हिस्से के लिए मौत का फरमान हैं पर कतार मैं लग कर नोट बदलवाने में कई लोगो की मौत हो गई इस मौत के लिए जिम्मेदार कौन है ?जिन लोगों ने विमुद्रीकरण का निर्णय लिया है, क्या वे इस मौत की जिम्मेदारी लेंगे ?विमुद्रीकरण से आई इस तबाही से परेशान होकर लोग सिर्फ सरकार को गालिया दे रहे है!
               पर यहाँ सोचने वाली बात ये है की क्या सिर्फ अकेले मोदी जी ने ये फैसला लिया था ? शायद नही क्यों की जब भी देश मैं कोई भी नियम और पॉलिसी बनते है तो वो एक समूह विशेष का निर्णय होता है और सरकार उस नियम और पोलिसी को प्रदर्शित और लागु करने का एक चहरा होती है या यूँ कहे सरकार तो बस नाम लूटती है!

               रिज़र्व बैंक भारत की अर्थव्यवस्था का अभिन्न अंग है जो भारत मैं मुद्रा के चलन और परिचालन का पूरा नियंत्रण करता है! रिजर्व बैंक का गवर्नर जो भी सर्कुलर जारी करता है वित मंत्रालय उसका स्पष्टीकरण देते हैं तो क्या विमुद्रीकरण के लिए अकेले सरकार जिम्मेदार हैं? किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए रिजर्व बैंक का गवर्नर उतना ही जिम्मेदार है जितना उस देश की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार!

               जहां एक और बताया गया की 1 हफ्ते में शहरी और 2 हफ्ते में ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति सामान्य हो जाएंगी वही दूसरी और रिजर्व बैंक के नियम हर दिन बदलते नज़र आ रहे हैं! बदलते नियमो के चलते आम जन को जो परेशानी हो रही है उसके लिए जिम्मेदार कोन हैं?
              भारतीय रिजर्व बैंक को बेहद तजुर्बेदार व्यक्तियों की जरुरत है, जो सरकार को बता सके कि कौन सा कदम गलत हे और कोनसा सही और साथ ही शानदार और सटीक प्लैंनिंग भी कर सके । यह कहना गलत नहीं होगा कि सरकार के साथ रिजर्व बैंक की कमेटी भी उतनी ही इस दुविधा के लिए जिम्मेदार है!
              अंत मैं सिर्फ यही कहना चाहता हु की मैं देश की अर्थव्यवस्था से काले धन को समाप्त करने के खिलाफ नहीं हूँ मैं सिर्फ इस तरीके के खिलाफ हूँ क्योंकि इसे जनता को समय दिए बगैर लागू किया गया।